Man Kunto Maula

de Momina Mustehsan
63 visitas

सजदे पे रब्बा
मंगिया दुआ रब्बा
यार मिला, यार मिला

सुज्जिया आंखिया
थकिया गल्ला रब्बा
यार मिला, यार मिला

मुझको मुझसे मिला दे
रब्बा कोई तो सिलाह दे
अब तो हारने लगी हूँ खुद से

मेरा आंसू वोह गिरा दे
जो तुझको हसा दे अब तो
अब तो हारने लगी हूँ खुद से

बेपरवाह
सैया ना हो
मुझसे खफा
सैया ना हो
बेपरवाह

मंगेया यार नु
मैं जिस तरह कोई
मंगदा है क्या
मंगदा है क्या

जेड़िया दुआवा माँगा
ओह नइयों लब्बिया
लभिया जहा
लभिया जहा

तूने जो भी लिखा है रब्बा
तुझको पता है
मैं तो मांग रही हूँ तुझसे

मेरी जो भी रज़ा है रब्बा
तुझको पता है
तेरे सामने खड़ी हूँ हक़ से

बेपरवाह
सैयां ना हो
मुझसे खफा
सैयां ना हो
बेपरवाह

बेपरवाह, बेपरवाह
बेपरवाह, बेपरवाह
बेपरवाह, बेपरवाह

कोई शाम कोई दिन तो ऐसा होवेगा
जो मेरे वास्ते मेरा होवेगा
ओहदे दिल दियां सैयां मैं सुन लांगी
रब जानदा ऐ कब होवेगा

मुझको यार से मिला दे रब्बा
अब तो सिला दे मैं तो
हारने लगी हूँ खुद से

मेरा आंसू वो गिरा दे
जो तुझको हसा दे तेरे
सामने खड़ी हूँ कब से

बेपरवाह
सैयां ना हो
मुझसे खफा
सैयां ना हो